बुलंदशहर में क्यों इकट्ठा हुए थे लाखों मुसलमान
प्रदेश में चुनाव प्रचार अपने अंतिम चरण में है. ऐसे में उन तस्वीरों, वीडियो और दावों की संख्या भी बढ़ी है जिन्हें राजनीतिक दल या उनके समर्थक अपने हिसाब से इस्तेमाल कर रहे हैं.
'एकता न्यूज़ रूम' ने इनमें से कुछ की पड़ताल की और उनकी सच्चाई आप तक लाने की कोशिश की है.
बाबरी मस्जिद के लिए जमा हुए मुसलमान - फ़ेक
सोशल मीडिया पर एक तस्वीर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का बताकर शेयर किया जा रहा है.
कई फ़ेसबुक यूज़र्स ने अपने क्लोज़ ग्रुप में लिखा है कि 'बुलंदशहर में बाबरी मस्जिद के लिए इकट्ठा हुए लाखों मुसलमान'.
बुलंदशहर में सोमवार को एक पुलिस अफ़सर की मौत के बाद हुए हंगामे से जोड़कर भी कुछ लोगों ने ये तस्वीर शेयर की है.
कई फ़ेसबुक पोस्ट्स का लब्बोलुआब ये था कि भारत में मुसलमानों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है जिससे हिंदुओं को ख़तरा है.
लेकिन हमने अपनी पड़ताल में पाया कि ये फ़ोटो बुलंदशहर (यूपी) का नहीं है.
दरअसल, लाखों मुसलमान 1-3 दिसंबर तक उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर (दरियापुर इलाक़े) में आयोजित 'इज्तेमा' में पहुँचे थे, मगर बाबरी मस्जिद विवाद का इस आयोजन से कोई लेना-देना नहीं है.
आसान भाषा में इज्तेमा को 'मुसलमानों का सत्संग' कहा जा सकता है. इन आयोजनों में मुस्लिम धर्म गुरू मुसलमानों से अपनी बेसिक शिक्षाओं की ओर लौटने का आह्वान करते हैं. भारत में सबसे बड़ा इज्तेमा भोपाल में आयोजित होता है. तीन दिन के इस कार्यक्रम में ज़्यादातर सुन्नी मुसलमान शिरकत करते हैं.
मुस्लिम धर्म गुरुओं के अनुसार, इज्तेमा को राजनीतिक मुद्दों से हमेशा दूर रखा जाता है.
अब बात बुलंदशहर के नाम से वायरल हो रही तस्वीर की, तो इस तस्वीर को 'इस्लाम फ़ॉर एवरीवन' नाम के फ़ेसबुक पेज ने 29 मई 2016 को पोस्ट किया था.
'एकता न्यूज़ रूम' ने इनमें से कुछ की पड़ताल की और उनकी सच्चाई आप तक लाने की कोशिश की है.
बाबरी मस्जिद के लिए जमा हुए मुसलमान - फ़ेक
सोशल मीडिया पर एक तस्वीर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का बताकर शेयर किया जा रहा है.
कई फ़ेसबुक यूज़र्स ने अपने क्लोज़ ग्रुप में लिखा है कि 'बुलंदशहर में बाबरी मस्जिद के लिए इकट्ठा हुए लाखों मुसलमान'.
बुलंदशहर में सोमवार को एक पुलिस अफ़सर की मौत के बाद हुए हंगामे से जोड़कर भी कुछ लोगों ने ये तस्वीर शेयर की है.
कई फ़ेसबुक पोस्ट्स का लब्बोलुआब ये था कि भारत में मुसलमानों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है जिससे हिंदुओं को ख़तरा है.
लेकिन हमने अपनी पड़ताल में पाया कि ये फ़ोटो बुलंदशहर (यूपी) का नहीं है.
दरअसल, लाखों मुसलमान 1-3 दिसंबर तक उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर (दरियापुर इलाक़े) में आयोजित 'इज्तेमा' में पहुँचे थे, मगर बाबरी मस्जिद विवाद का इस आयोजन से कोई लेना-देना नहीं है.
आसान भाषा में इज्तेमा को 'मुसलमानों का सत्संग' कहा जा सकता है. इन आयोजनों में मुस्लिम धर्म गुरू मुसलमानों से अपनी बेसिक शिक्षाओं की ओर लौटने का आह्वान करते हैं. भारत में सबसे बड़ा इज्तेमा भोपाल में आयोजित होता है. तीन दिन के इस कार्यक्रम में ज़्यादातर सुन्नी मुसलमान शिरकत करते हैं.
मुस्लिम धर्म गुरुओं के अनुसार, इज्तेमा को राजनीतिक मुद्दों से हमेशा दूर रखा जाता है.
अब बात बुलंदशहर के नाम से वायरल हो रही तस्वीर की, तो इस तस्वीर को 'इस्लाम फ़ॉर एवरीवन' नाम के फ़ेसबुक पेज ने 29 मई 2016 को पोस्ट किया था.
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